Taurat Kitab Hindi Work
यहूदी धर्म में, तोराह (Torah) केवल एक किताब नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण यहूदी जीवन और चिंतन की आधारशिला है। यहूदी मान्यताओं के अनुसार, तोराह में ईश्वर का संपूर्ण सत्य निहित है, और इसे पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना हर यहूदी का परम कर्तव्य है।
एक मुसलमान के लिए अल्लाह की भेजी गई सभी आसमानी किताबों पर ईमान (विश्वास) लाना अनिवार्य है। कुरान में कई जगहों पर तौरात का जिक्र सम्मान के साथ किया गया है। कुरान के अनुसार, तौरात में 'नूर' (प्रकाश) और 'हिदायत' (मार्गदर्शन) था।
इस्लाम में तौरात का मुकाम (Importance of Taurat in Islam) taurat kitab hindi
किसी दूसरे की संपत्ति या चीज का लालच न करना।
तौरात केवल नियमों की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह इंसान और ईश्वर के रिश्ते को परिभाषित करती है: एकेश्वरवाद: यहूदी धर्म में
हिंदी में उपलब्ध अनुवादों के कारण आम लोग अब इसे अपनी भाषा में समझ सकते हैं। इतिहास की जानकारी:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तौरात किताब पर नाजिल (अवतरित) हुई थी। हजरत मूसा को यहूदी धर्म में 'मोशे' और ईसाई धर्म में 'मोजेस' के नाम से जाना जाता है। अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को मिस्र (Egypt) के राजा फिरौन (Pharaoh) के अत्याचारों से बनी इसराइल (Israelites) को आजाद कराने और उन्हें सही रास्ता दिखाने के लिए इस किताब से नवाजा था। और इसे पढ़ना
तौरात (जिसे हिब्रू में 'तोराह' और अंग्रेजी में 'Torah' कहा जाता है) मूल रूप से वह पवित्र ग्रंथ है जो ईश्वर (अल्लाह) द्वारा हज़रत मूसा (Prophet Moses) पर नाजिल (प्रकट) किया गया था।
तौरात (Taurat) दुनिया के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र किताबों में से एक है। इस्लामिक और यहूदी-ईसाई (Judeo-Christian) परंपराओं में इसका एक विशेष और सम्मानित स्थान है। इस्लाम धर्म के अनुसार, यह अल्लाह द्वारा मानव जाति के मार्गदर्शन के लिए अवतरित की गई चार प्रमुख आसमानी किताबों में से सबसे पहली किताब है।
तौरात किताब क्या है? (What is the Taurat Book?)